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तलाक लेने से पहले जाने यह कानूनी नियम जिसकी जानकारी सभी शादीशुदा जोड़े को होनी चाहिए

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 तलाक लेने से पहले जाने यह कानूनी नियम जिसकी  जानकारी सभी शादीशुदा जोड़े को होनी चाहिए माना जाता है कि शादी के जोड़े स्वर्ग में बनते है। लेकिन अक्‍सर वैवाहिक रिश्‍ते में बंधते वक्‍त अपना जीवन साथी सही महसूस करते है लेकिन कई बार अपने जीवन साथी के साथ विचार न मिलने के कारण जल्‍द ही वैवाहिक रिश्‍ते में   घुटन सी स्थिति उत्‍पन्‍न होने लगती है। शादी होने के बाद वैवाहिक जीवन में कई समास्‍याओं का सामना करना पड़ता है जिसके कारण तलाक लेने की स्थिति आ जाती है इस रिश्ते को तोड़ने के लिए कानूनी प्रक्रिया की जरूरत होती है जिला न्‍यायालय में अपने एडवोकेट के द्वारा तलाक   की अर्जी देकर अपने पति-पत्नी के   आपसी संबंध सामाजिक और कानूनी दोनों ही आप खत्म कर सकते हैं। लेकिन अक्‍सर देखा गया है कि   कोर्ट-कचहरी के नाम से ज्यादातर भारतीय लोग घबराते हैं भारत में तलाक लेने के दो तरीके है एक तो पति-पत्नी दोनों के आपसी सहमति से तलाक लिया जा सकता और और दूसरा एकतरफा   दोनों पति-पत्नी में से एक   अपने एडवोकेट से मिलकर कोर्ट में तलाक के लिए अपना द...

लॉकडाउन किस कानून के तहत लागू किया गया है ?

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लॉ कडाउन किस कानून के तहत लागू किया गया है ? हमारे भारत में तेजी से पांव पसारते कोरोनावायरस पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में मंगलवार , 24 मार्च 2020 की रात 12 बजे से 21 दिनों तक लॉकडाउन लागू होने की घोषणा की थी। इसके साथ ही पूरे देश में धारा 188 भी लागू हो गई थी। जो 21 दिनों के बाद  आज  भी लॉकडाउन की स्थिति बनी हुई है कोरोनावयारस से लड़ने के लिए लॉकडाउन की घोषणा महामारी कानून ( Epidemic Diseases Act, 1897) के अंतर्गत लागू किया गया है। इसी कानून में प्रावधान किया गया है कि अगर लॉकडाउन में सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का कोई व्यक्ति उल्लंघन करता है , तो उस पर भारतीय दंड संहिता ( IPC - Indian Penal Code) की धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। भारतीय दंड संहिता की धारा 188 क्या है।   महामारी कानून ( Mahamari Act) 1897 के सेक्शन 3   में इस बात का जिक्र किया गया है कि अगर कोई व्‍यक्ति इस कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है , सरकार / कानून के निर्देशों / नियमों को तोड़ता है , तो उसे ...

MACT मोटर एक्सीडेंट केस में मुआवजा

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MACT मोटर एक्सीडेंट केस में मुआवजा MACT मोटर एक्सीडेंट केस में मुआवजा सिर्फ उस व्‍यक्ति को मिल सकता है जिसकी एक्सीडेंट किसी व्‍हीकल से हुई है वह व्‍हीकल मोटर व्‍हीकल एक्‍ट के अतंर्गत रजिस्‍टर्ड हो मतलब की उसका नंबर हो। इसमें कोई साईकिल या बैटरी से चलने वाले अन - रजिस्‍टर्ड व्‍हीकल नही आते है। MACT मोटर एक्सीडेंट केस में मुआवजा लेना कोई मुशकिल काम नही है अब कोर्ट ने इसका प्रोसीजर बहुत आसान बना दिया है। 1.       एक्सीडेंट ग्रस्‍त व्‍यक्ति के अधिकार - एक्सीडेंट ग्रस्‍त व्‍यक्ति कोर्ट में केस डाल कर कोर्ट से मुआवजा ले सकता है। तथा दोषी को सजा करवा सकता है। 2.       एक्सीडेंट में मुत्‍यु होने पर अधिकार एक्सीडेंट ग्रस्‍त व्‍यक्ति की मुत्‍यु होने की दशा में उसके परिजन वाले (Legal heirs)  कोर्ट में केस डाल कर कोर्ट से मुआवजा ले सकते है Legal heirs   में उस व्‍यक्ति के माता-पिता पत्‍नी/पति , बच्‍चे तथा इनके न होने पर भाई-बहन शामिल है। 3.       एक्सीडेंट होन पर किससे सम्‍पर्क करें ...